सोमवार, मई 24, 2010

खरी बातें सोने के सामान होती हैं !


-उमेश पाठक

कहते हैं की सोना हमेशा मूल्यवान होता है! वक्त के साथ उसकी कीमत भी बढती रहती है ! कुछ खरी बातें भी सोने के ही सामान होतीं हैं जिनकी कीमत कभी भी कम नहीं होती ! छोट-छोटे दोहे ,सूक्तिय और संस्कृत के शलोक इसके प्रमाण हैं !जीवन के इस आपाधापी में हम जहाँ भौतिकता में आकंठ डूबे हुयें हैं,वहीं कभी-कभी ऐसी घटना हो जाती है जिनको हम समझते हुए , कुछ पुरानी बातो /कथनों का भी स्मरण कर लेते हैं! ऐसी बातों में सबसे प्रमुख हैं रहीमदास जी के दोहे ! छोटे शब्दों में जीवन से जुड़े अनुभवों का इतना सटीक लेख कही नहीं देखने को मिलता है! इनमे जहाँ एक और जीवन के गंभीर पहलू हैं तो दूसरी और हलके -फुल्के मनुहार भी हैं ! सच्चे और कड़वे अनुभवों को रहीमदास जी ने बड़े ही सरल तरीके से समझाया है! उनके उदाहरण हमें समझने में बड़ी मदद करते हैं ! तो आइये एक बार फिर मनन करें रहीमदास के कुछ प्रसिद्ध दोहों का !

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥

देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन।
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥

अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम।
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥

गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।
जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥

छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

खीरा को मुंह काटि के, मलियत लोन लगाय।
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि।
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

टूटे सुजन मनाइए, जो टूटे सौ बार।
रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥

आब गई आदर गया, नैनन गया सनेहि।
ये तीनों तब ही गये, जबहि कहा कछु देहि॥

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।
जिनको कछु नहि चाहिये, वे साहन के साह॥

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥

माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।
फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥

रहिमन वे नर मर गये, जे कछु माँगन जाहि।
उनते पहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि॥

रहिमन विपदा ही भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥

बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥

मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।
फट जाये तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥

रहिमह ओछे नरन सो, बैर भली ना प्रीत।
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँति विपरीत॥

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥


शनिवार, मई 22, 2010

आइये सीखे कुछ हिंदी के समानार्थी शब्द !

- उमेश पाठक
नमस्कार दोस्तों ! महानगरों में आज-कल हिंदी भाषा की दुर्दशा है,खास तौर पर हमारे युवा हिंदी में काफी दिक्कत महसूस करतें हैं! कभी -कभी तो सामान्य सा कोई शब्द भी उनकी समझ में नहीं आता! हिंदी केवल हमारी राष्ट्रभाषा है बल्कि यह दुनिया की उन कुछ भाषाओँ में से है जिसमे ,जो लिखा जाता है,वही पढ़ा जाता है और वही बोला जाता है! हमें गर्व होना चहिये कि हम ऐसी वैज्ञानिक भाषा से जुड़े हुए हैं! महात्मा गाँधी अंग्रेजी में महारत हासिल होने के बाद भी इसी कारण से हिंदी के प्रति अपार स्नेह रखते थें ! आइये सीखे कुछ हिंदी के समानार्थी शब्द:

अतिथि atithi (guest) मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक, पाहुना
अमृत amrit (nectar) सुधा, सोम, पीयुष, अमिय, अमी
अग्नि agni (fire) अनल, पावक, वहनि, कृशानु, शिखी
अनुपम anupam (unique) अपूर्व, अतुल, अनोखा, अदभुत, अनन्य
अर्थ arth (money) धन्, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा
अश्व ashv (horse) हय, तुरङ, वाजि, घोडा, घोटक
अंधकार andhakaar (darkness) तम, तिमिर, तमिस्र, अँधेरा
असुर sur (devil) दनुज, दैत्य, राक्षस , निशाचर, दानव, रात्रिचर
अंहकार ahankaar (vanity) दंभ, दर्प, घमंड, अभिमान
आँख aankh (eye) नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, अक्ष , दृष्टि, विलोचन
आकाश aakaash (sky) नभ, गगन, अंबर, अंतरिक्ष, आसमान, व्योम्
आत्मा aatma (soul) जीव, देव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण
ईच्छा ichchaa (wish) अभिलाषा, कामना, अभिप्राय, मनोरथ, अभीष्ट
इंद्र Indra सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर
ईश्वर ishwar (god) परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर
कमल kamal (lotus) जलज, पंकज, नलिन, पदम्, अरविंद, उत्पल, सरोज्, राजीव, नीरज
किरण kiran (ray) रश्मि, अंशु, कर, मयुख, मरीच, ज्योति, प्रभा
कोयल koyal (nightingale) कोकिला, पिक, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया
गणेश Ganesh विनायक, गणपति, लंबोदर, गजानन्
गंगा ganga (Ganges) भगीरथी, मंदाकिनी,सुरसरिता, देवनदी, जाह्नवी
गर्मी garmi (heat) ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा
चंद्र chandra (moon) हिमांशु, इंदु, सुधाकर, विधु, शशि, चंद्रमा, तारापति
जल jal (water) नीर, तोय, वारि, अमृत, उदक, अंबु, पानी
जेवर jewar (jewelry) गहना, अलंकार, भूषण, आभरण, मंडल
धनुष dhanush (bow) चाप्, शरासन, कमान, कोदंड, धनु
नदी nadi (river) सरिता, तटिनी, तरंगिनी, जलमाला, दरिया
नाव naav (boat) नौका, तरणी, तरी
पक्षी pakshi (bird) खेचर, खग, विहंग, नभचर, दविज, पतंग, पंछी
पत्नी patni (wife) भार्या, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी
पवन pawan (air) वायु, समीर, हवा, अनिल, समीर , स्पर्शन
पहाड़ pahaad (mountain) पर्वत, शैल, गिरि, नग, धरणीधर, धराधर, महीधर
पुत्र putra (son) बेटा, सुत, आत्मज, तनय
पुष्प pushp (flower) कुसुम, फूल, प्रसून, सुमन, पुहुप
पृथ्वी prithvi (earth) धरा, धरती, मही, वसुंधरा, वसुधा, जमीन, भूमि
माता mata (mother) जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा
मित्र mitra (friend) सखा, सहचर, साथी, दोस्त
मेघ megh (cloud) बादल, पयोद, जलधर, पयोधर
वन van (forest) कानन, विपिन, अरण्य, कांतार
वृक्ष vriksh (tree) तरू, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम
शत्रु shatru (enemy) रिपु, अरि, विपक्षी, अराति, दुश्मन, वैरी
समुद्र samudra (sea,ocean) सिंधु, रत्नाकर, पयोधि, सागर, जलधि, उदधि
समूह smooh (group) दल, झुंड, वृंद, गण, पुंज
सर्प sarp (snake) अहि, नाग, भुजंग, विषधर, साँप, ब्याल
स्त्री istri (lady) नारी, महिला, अबला, ललना, औरत, कामिनी
संसार sansaar (world) विश्व, लोक, जगत
सिंह sinh (lion) मृगराज, केसरी, हरि, मृगपति, शेर
सुगंधि sugandhi (scent) सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू
सुर्य surya (sun) भास्कर, रवि, दिवाकर, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, दिनेश
स्वर्ग swarg (heaven) सुरलोक, देवलोक, परमधाम, त्रिदिव, दयुलोक
स्वर्ण swarn (gold) कंचन, कनक, कुंदन, हेम, सोना
हाथ haath (hand) हस्त, कर, पाणि
हाथी haathi (elephant) नाग, हस्ती, राज, कुंजर, मतंग, वारण
कुछ प्रचलित अंग्रेजी शब्दों की हिंदी :

Hello - नमस्कार, नमस्ते

Hi - सुनो, सुनिए

Bye - अलविदा

Hello - जी, माफ़ कीजिये

Thank you - धन्यवाद, धन्य-वाद

Yours faithfully - भवदीव

Yours sincerly - आपका

Yours truely - भवदीय , आपका

My friend - मेरा दोस्त

My life partner - मेरे हमसफ़र

Mr. - श्रीमान
Mrs. - श्रीमती
Miss - कुमारी
Master - कुमार

Go Away - चले जाओ
Come here - इधर आओ
Shut up - चुप रहो

बुधवार, मई 12, 2010

एक कहानी अम्मा की !


रात हमारी आँखों से फ़िर बही कहानी अम्मा की,
खिड़की से जब सटकर महकी रात की रानी अम्मा की!


दादा की वो गिरी हवेली ,टुटा तुलसी का चौरा ,

पिछवारे की नीम भी जाने ,उमर खपानी अम्मा की!


हम लोगो को खिला-पिला के, जब अम्मा थक जाती थी,
हमने देखी पानी पीकर, भूख छुपानी अम्मा की !


खीर ,पनीर या दाल मखानी और परांठें गोभी के ,
अदरक लहसुन के चटनी सी ,गंध सुहानी अम्मा की !


छोड़-छाड़कर चले गएँ सब किसको उसका ध्यान रहा,
बस बाबु को याद रही वो चिता जलानी अम्मा की!


दे कर अपना चेहरा-माथा अम्मा जाने कहा गयी,
हम जिंदा हैं इस दुनिया में एक निशानी अम्मा की!


रात हमारी आँखों से फ़िर बही कहानी अम्मा की,
खिड़की से जब सटकर, महकी रात की रानी अम्मा की!

रविवार, मई 02, 2010

एक नाज़ुक एहसास !


-उमेश पाठक

दोस्तों ! जिंदगी बड़ी अजीब है ओर ये कब क्या रूप ले लेगी ये कोई भी नही जानता! मिलना-बिछड़ना भी जिंदगी का एक हिस्सा है !ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद में एक संवाद है-"जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में है,हम सब उसके हाथ की कठपुतलियां है,कब ,कौन कैसे उठेगा कोई नहीं जानता !"मिलना -बिछड़ना भी इसी नियम के अंदर है ! कब कौन कहाँ मिले-बिछड़े ये भी उसी नियति पर ही निर्भर करता है ! मशहूर शायर निदा फाजली ने सच ही कहा है-

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफर के हम हैं!
रूख हवाओं का ,जिधर का है,उधर के हम हैं !


काफी समय के बाद किसी से मिलना तो सबको अच्छा लगता है लेकिन कोई ऐसा जिससे ,आप जेहनी तौर पर जुड़े हों और वर्षों से उसका कुछ पता न हो....एक दिन अचानक ...फोन की घंटी......और फिर मिल-बैठ कर माजी (अतीत ) को कुरेदना /महसूस करना ........एक अजीब सुखद अनुभूति होती है न? पिछले हफ्ते कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ!भला हो मेरे ब्लॉग का जिसके कारण उसे मुझे ढूढने में सफलता मिली ! दोस्तों जिंदगी में यार -साथी बहूत से होते हैं लेकिन मित्र एक -दो ही मिलते हैं,जिनसे आप अपनी बातें कह-सुन सकें ! सच में ये तकनीकी कभी-कभी कितनी सुखद हो उठती है ,इसका एहसास हो रहा था ! पुरानी यादों को देख कर मौसम भी मेहरबान था और दिल्ली के तपते वातावरण को अपनी यादों की ठंडी फुहारें दे रहा था ,मतलब बारिश शुरू हो गयी ! काफी के प्याले इस बारिश में कुछ अधिक ही आनंद बढ़ा रहे थें !दो और पुराने मित्रों की मुलाकात ने तो इस वक्त को ओर भी यादगार बना दिया !वर्षों के बाद शुरू हुयी बात -चीत के बीच कब वक्त ने अपनी मज़बूरी जता दी ......पता ही नहीं चला ! वक्त रुकता नहीं कही टिक कर ,इसकी आदत भी आदमी सी है और वक्त की मजबूरियों के साथ पुरानी यादों को दामन में समेटे हम वापस लौटे अतीत से वर्तमान की ओर ,जहाँ रोज़ी-रोटी का चक्कर हमें सबसे दूर किये रहता है और अपने हिसाब से वक्त हमें दौड़ाता है ! इस परिस्थिति में बशीर बद्र की ये पक्तियां सामयिक लगती हैं-

"मै हर लम्हे में सदियाँ देखता हूं, तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है ! "


उसी बौद्धिक मित्र के सहयोग से उधार की ये पक्तियां आप के लिए प्रस्तुत कर पा रहा हूं.सुनिए ओर गुनिये !

एक नाज़ुक एहसास !

मिटटी के जितने घर में बानाता चला गया..

एक शख्स खफा हो के गिराता चला गया..

वो मुझ से बहूत दूर-दूर भागता रहा..

जितने मैं उस के नाज़ उठाता चला गया..

एक मेरे ही वास्ते उसे ने दर्द रखे थे ,

बाकी तो वो हर एक को हंसाता चला गया..

थी हाथ में ताक़त, पर दिल ही नहीं माना,

उस के सिवा मैं सब को हराता चला गया..

दिल में उसकी याद के जितने चिराग थे ,

उनको भी सितमगर वो बुझाता चला गया..